इसरो नाविक (ISRO NavIC) क्या है? इसके क्या फायदे हैं? - जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि गूगल मैप में किसी जगह का पता लगाने के लिए GPS तकनीकी का प्रयोग किया जाता है। इसी को देखते हुए भारत ने अपना खुद का सेटेलाइट सिस्टम लांच किया है जिसका नाम NavIC  है। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि NavIC क्या है और इसके क्या फायदे हैं? तो इस आर्टिकल में हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

 इसरो नाविक (ISRO NavIC) क्या है?

NavIC का पूरा नाम Navigation With India Constellation है। NavIC सेटेलाइट सिस्टम को भारत ने खुद लांच किया है। यह IRNSS (Indian Regional Navigation Settlite System) का ऑपरेशन नाम है। इस नेविगेशन सिस्टम के लिए भारत ने अंतरिक्ष में 8 सेटेलाइटों का एक जाल बिछाया है, जो भारत की सीमा से 1600 किमी क्षेत्र तक अपनी पकड़ बनाए रखता है। इसका पहला सेटेलाइट 2013 में और अंतिम सेटेलाइट 2018 में लॉन्च किया गया था। 

इस नेविगेशन सिस्टम को बनाने का काम मई 2013 से शुरू हुआ था। अब इसे लॉन्च कर दिया गया है। NavIC के लांचिंग के साथ भारत खुद के Navigation Satellite System वाला5वां देश बन चुका है। इससे पहले अमेरिका के पास GPS, रूस के पास GLONASS, यूरोप के पास Galileo और चीन के पास BeiDou Navigation Satellite System है। 


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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) 2020 के अनुसार भारत के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक और  संयुक्त राज्य रक्षा सचिव के संयुक्त परामर्श में NavIC, Galileo और QZSS (Quasi-Zenith Satellite System)को Allied Navigational Satellite System के रूप में नामित किया गया है। Quasi-Zenith Satellite System (QZSS) जापान सरकार द्वारा जापान पर फोकस करने के साथ-साथ एशिया-ओशिनिया क्षेत्रों में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संचालित GPS को बढ़ाने के लिए बनाया गया है।

GPS और NavIC में कौन बेहतर है?

GPS और NavIC की तुलना करें तो NavIC; GPS से कहीं बेहतर है। दरअसल NavIC Dual-Frequency पर काम करता है जबकि GPS Single Frequency पर काम करता है। NavIC के Dual-Frequency के कारण यह शहरी इलाकों में GPS के मुकाबले 6 गुना अधिक सटीक परिणाम देगा। क्योंकि NavIC भारत द्वारा लांच किया गया नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम है, इसीलिए इसे भारत के भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार तैयार किया गया है। यह भारत की छोटी गलियों और पगडंडी वाले रास्तों पर भी सटीकता से काम करेगा।

NavIC का उपयोग कहाँ होगा?

अब आपके मन में यह सवाल आता होगा कि NavIC का उपयोग कहां होगा? दरअसल आने वाले समय में NavIC का उपयोग सरकार और जनता दोनों कर सकेगी। फिलहाल इस सुविधा का लाभ सिर्फ सरकार ही ले रही है। जल्द ही इससे आम जनता के उपयोग के लिए भी लाया जा सकेगा। इसके लिए भारत सरकार कुछ अच्छे प्रोसेसर वाले स्मार्टफोन कंपनियों के साथ समझौता करने जा रही है। 

इसके अलावा भारत में बनने वाली गाड़ियों में भी अब GPS की जगह NavIC सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। NavIC सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का प्रयोग जल, थल और आकाश तीनों मार्गों के लिए किया जा सकेगा। इस सिस्टम के लॉन्च होने के बाद से सीमाओं पर होने वाली घुसपैठ पर भी नजर रखी जा सकेगी और साथ ही साथ जलमार्ग में भी होने वाले घुसपैठ पर नजर रखी जा सकती है।

NavIC नेविगेशन सिस्टम के लांच होने के बाद से आपदा के समय में भी इसकी मदद से सुदूर इलाकों में जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सकती है। इस नेविगेशन सिस्टम की वजह से बहुत ही कम समय में वहां का अधिक से अधिक डाटा प्राप्त किया जा सकता है। पहले इस डाटा के लिए GPS यानी अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता था। NavIC नेविगेशन सिस्टम खेती करने के लिए भी मददगार साबित होगी। 

NavIC सेटेलाइट सिस्टम की मदद से मिट्टी की गुणवत्ता मौसम और फसल को लेकर जानकारी प्रदान किया जा सकेगा। इसके अलावा इसकी वजह से जंगल में होने वाली आग दुर्घटनाओं पर भी नजर रखी जा सकेगी और जंगल में रहने वाले जानवरों पर भी पूरी नजर रखी जा सकेगी। 

भारत के पहले नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम NavIC के लॉन्च होने के बाद से यह अमेरिका जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ सकता है। आने वाले समय में आपको कई बड़े-बड़े स्मार्ट फोन में NavIC नेविगेशन सिस्टम का सपोर्ट मिल जाएगा। इसके बाद आप भी NavIC नेविगेशन सिस्टम का पूरी तरह से प्रयोग कर सकते हैं जैसा अभी सरकार कर रही है।


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